FIR दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के आधिकारिक Police Citizen Portal पर उपलब्ध FIR सेवा का उपयोग किया जाता है। अलग-अलग राज्यों में इस सेवा का नाम, मांगी जाने वाली जानकारी और कॉपी देखने या डाउनलोड करने की सुविधा अलग हो सकती है।

FIR का दर्ज होना और उसकी कॉपी का सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध होना दो अलग बातें हैं। सामान्य FIR को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के संबंध में Supreme Court ने दिशा-निर्देश दिए हैं, जबकि संवेदनशील मामलों की कुछ FIR सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराई जातीं।

FIR की ऑनलाइन कॉपी कहाँ मिलेगी?

FIR की ऑनलाइन कॉपी सामान्यतः उसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के आधिकारिक Police Citizen Portal पर उपलब्ध होती है जहाँ FIR दर्ज हुई है। गृह मंत्रालय का Digital Police Portal अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के Police Citizen Portals तक पहुँच उपलब्ध कराता है।

इसलिए किसी एक वेबसाइट पर पूरे देश की सभी FIR खोजने के बजाय उस राज्य के आधिकारिक पुलिस पोर्टल का उपयोग करना चाहिए जहाँ संबंधित FIR दर्ज हुई है।

ध्यान रखें

FIR खोजते समय केवल सरकारी पुलिस वेबसाइट या आधिकारिक Citizen Portal का उपयोग करें। किसी अनजान वेबसाइट पर FIR नंबर, मोबाइल नंबर या अन्य व्यक्तिगत जानकारी दर्ज न करें।

FIR की कॉपी ऑनलाइन कैसे प्राप्त करें?

संबंधित राज्य का Police Citizen Portal खोलने के बाद FIR से जुड़ी सेवा चुनें। अलग-अलग portals पर इसका नाम View FIR, Search FIR या इससे मिलता-जुलता हो सकता है।

  1. आधिकारिक पुलिस पोर्टल खोलें — उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की Police website या Citizen Portal पर जाएँ जहाँ FIR दर्ज हुई है।
  2. FIR देखने की सेवा चुनें — उपलब्ध विकल्पों में View FIR, Search FIR या संबंधित FIR सेवा खोलें।
  3. मांगा गया विवरण भरें — पोर्टल के अनुसार FIR Number, Year, District, Police Station या Date जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। सभी portals पर समान जानकारी मांगी जाए, यह आवश्यक नहीं है।
  4. सही FIR की पहचान करें — खोज परिणाम में FIR Number, Police Station और उपलब्ध अन्य विवरण मिलाकर संबंधित FIR खोलें।
  5. कॉपी प्राप्त करें — FIR सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर पोर्टल पर दिए गए View, Print या Download विकल्प से उसकी कॉपी प्राप्त करें।

FIR नंबर, Police Station या अन्य उपलब्ध विवरण से रिकॉर्ड खोजने की प्रक्रिया FIR का स्टेटस चेक करने में भी उपयोगी होती है, लेकिन वहाँ उद्देश्य FIR की कॉपी प्राप्त करने के बजाय उपलब्ध case status देखना होता है।

Supreme Court ने Youth Bar Association of India v. Union of India (2016) में निर्देश दिया कि सामान्यतः FIR की कॉपी पुलिस की वेबसाइट पर और ऐसी वेबसाइट उपलब्ध न होने पर राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य FIR से संबंधित व्यक्ति को उसकी कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। Supreme Court ने Saurav Das v. Union of India (2023) में भी इन निर्देशों का उल्लेख किया।

सामान्य स्थिति में FIR को दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का निर्देश है। अपरिहार्य कठिनाई (unavoidable difficulty) होने पर यह अवधि 48 घंटे तक हो सकती है। भौगोलिक स्थिति के कारण internet connectivity की समस्या होने पर यह अवधि 72 घंटे तक जा सकती है।

व्यावहारिक अर्थ

Police Station में FIR दर्ज होने और उसकी कॉपी वेबसाइट पर उपलब्ध होने के बीच समय का अंतर हो सकता है। इसलिए FIR दर्ज होने के तुरंत बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड न मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि FIR दर्ज नहीं हुई है।

कौन-सी FIR ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो सकती?

हर FIR को सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराना आवश्यक नहीं है। Supreme Court ने संवेदनशील प्रकृति की FIR को सामान्य ऑनलाइन प्रकाशन से अलग रखा है। इनमें यौन अपराध (Sexual Offences), POCSO से जुड़े अपराध, आतंकवाद (Terrorism) और उग्रवाद (Insurgency) जैसे मामलों का उदाहरण दिया गया है।

किसी FIR को संवेदनशील मानकर वेबसाइट पर अपलोड न करने का निर्णय भी किसी भी स्तर का पुलिस अधिकारी नहीं ले सकता। Supreme Court के निर्देश के अनुसार यह निर्णय पुलिस उपाधीक्षक (Deputy Superintendent of Police—DSP) से नीचे के पद का अधिकारी नहीं ले सकता। जहाँ यह अधिकार जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) को प्राप्त है, वहाँ वह भी ऐसा निर्णय ले सकता है।

इसलिए संवेदनशील मामले में FIR विधिवत दर्ज होने के बावजूद उसकी कॉपी सामान्य public portal पर देखने या download करने के लिए उपलब्ध न हो सकती है।

FIR ऑनलाइन दिखाई न दे तो इसका क्या अर्थ है?

ऑनलाइन खोज में FIR न मिलने के कई कारण हो सकते हैं। FIR अभी वेबसाइट पर upload न हुई हो, दर्ज किए गए विवरण से सही record न मिल रहा हो या संबंधित FIR संवेदनशील होने के कारण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न कराई गई हो।

महत्वपूर्ण

FIR का ऑनलाइन उपलब्ध न होना, FIR दर्ज न होने का प्रमाण नहीं है।

ऐसी स्थिति में FIR के उपलब्ध रिकॉर्ड को FIR का स्टेटस देखकर अलग से जांचा जा सकता है।

ऑनलाइन उपलब्धता और FIR की कॉपी पाने का अधिकार

FIR का सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध होना और सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को उसकी कॉपी मिलना अलग कानूनी व्यवस्थाएँ हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173(2) के अनुसार दर्ज की गई सूचना की कॉपी informant या victim को तत्काल और निःशुल्क दी जानी है।

इसलिए सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित का FIR की कॉपी पाने का अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि FIR ऑनलाइन उपलब्ध है या नहीं। ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध न होने पर भी वह FIR की कॉपी प्राप्त करने के लिए उपलब्ध प्रक्रिया अपना सकता है।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

📌 एक नज़र में
  • FIR की ऑनलाइन कॉपी संबंधित State/UT के आधिकारिक Police Citizen Portal पर प्राप्त की जा सकती है।
  • अलग-अलग राज्यों में FIR खोजने और डाउनलोड करने की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
  • सामान्यतः FIR को दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन उपलब्ध कराने का Supreme Court का निर्देश है।
  • अपरिहार्य कठिनाई में यह अवधि 48 घंटे और भौगोलिक connectivity की समस्या में 72 घंटे तक हो सकती है।
  • संवेदनशील प्रकृति की कुछ FIR सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराई जातीं।
  • FIR का ऑनलाइन न मिलना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि FIR दर्ज नहीं हुई है।
  • सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को दर्ज सूचना की कॉपी तत्काल और निःशुल्क पाने का अलग कानूनी अधिकार है।

निष्कर्ष

FIR की कॉपी ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के आधिकारिक Police Citizen Portal का उपयोग करना चाहिए जहाँ FIR दर्ज हुई है। पोर्टल पर मांगी गई जानकारी भरने के बाद, FIR सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर उसे देखा, print किया या download किया जा सकता है।

FIR का ऑनलाइन उपलब्ध होना उसके दर्ज होने या सूचना देने वाले व्यक्ति और पीड़ित के कॉपी पाने के कानूनी अधिकार के समान नहीं है। सामान्य FIR को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए Supreme Court के दिशा-निर्देश हैं, जबकि संवेदनशील FIR को सार्वजनिक पोर्टल से बाहर रखा जा सकता है।