किसी बच्चे के साथ मारपीट, यौन अपराध, अपहरण, क्रूरता, मानव तस्करी या कोई अन्य अपराध होने पर उसकी सूचना पुलिस को देकर शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Report—FIR) दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिए केवल बच्चे के माता-पिता का शिकायतकर्ता होना आवश्यक नहीं है। अपराध की जानकारी रखने वाला अन्य व्यक्ति भी पुलिस को सूचना दे सकता है।

इस पेज में “बाल अपराध” से आशय बच्चे के विरुद्ध किए गए अपराध से है। यदि किसी बच्चे पर स्वयं अपराध करने का आरोप है, तो वह अलग कानूनी विषय है और किशोर न्याय (Juvenile Justice) कानून के अंतर्गत उसकी अलग प्रक्रिया लागू होती है।

बच्चे के विरुद्ध अपराध की शिकायत कौन कर सकता है?

अपराध से प्रभावित बच्चा स्वयं पुलिस को जानकारी दे सकता है। उसके माता-पिता, अभिभावक, रिश्तेदार या घटना की जानकारी रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति भी पुलिस को सूचना दे सकता है। इसलिए बच्चे के विरुद्ध अपराध की शिकायत केवल माता-पिता या अभिभावक तक सीमित नहीं है।

यदि मामला बच्चे के विरुद्ध यौन अपराध का है, तो लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act—POCSO Act) की विशेष रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होती है। POCSO Act की धारा 19 के अनुसार कोई भी व्यक्ति, जिसमें स्वयं बच्चा भी शामिल है, ऐसे अपराध के होने की आशंका या उसके होने की जानकारी विशेष किशोर पुलिस इकाई (Special Juvenile Police Unit—SJPU) या स्थानीय पुलिस (Local Police) को दे सकता है।

सामान्य अपराध और POCSO मामले में अंतर

बच्चे के विरुद्ध सामान्य संज्ञेय अपराध की सूचना और FIR पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita—BNSS) की व्यवस्था लागू होती है। यदि मामला बच्चे के विरुद्ध यौन अपराध का है, तो इसके साथ POCSO Act की विशेष रिपोर्टिंग संबंधी जिम्मेदारियाँ भी लागू होती हैं।

बच्चे के विरुद्ध अपराध की शिकायत कहाँ करें?

यदि बच्चे के विरुद्ध हुई घटना से संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) प्रकट होता है, तो उसकी सूचना पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को दी जा सकती है। शिकायत देने के लिए पहले यह तय करना आवश्यक नहीं है कि मामला बच्चों से संबंधित किसी विशेष पुलिस इकाई को ही दिया जाए।

बच्चों से जुड़े मामलों के लिए किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 पुलिस व्यवस्था में विशेष प्रावधान करता है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पुलिस थाने में कम-से-कम सहायक उपनिरीक्षक (Assistant Sub-Inspector—ASI) स्तर के अधिकारी को बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (Child Welfare Police Officer—CWPO) के रूप में नामित करने और प्रत्येक जिले व शहर में विशेष किशोर पुलिस इकाई (Special Juvenile Police Unit—SJPU) गठित करने की व्यवस्था है।

यदि मामला POCSO Act के अंतर्गत आने वाले यौन अपराध से संबंधित है, तो सूचना विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या स्थानीय पुलिस को दी जा सकती है। इसलिए ऐसे मामले में शिकायतकर्ता को केवल किसी विशेष इकाई तक पहुँचने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है; स्थानीय पुलिस भी POCSO के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने वाली प्राधिकृत इकाई है।

शिकायत केवल उसी पुलिस थाना क्षेत्र में देना आवश्यक नहीं है जहाँ घटना हुई है। BNSS की धारा 173(1) के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना उस क्षेत्र की सीमा से स्वतंत्र होकर दी जा सकती है जहाँ अपराध हुआ है। इसलिए दूसरे जिले या राज्य में हुई घटना की FIR के मामले में भी केवल क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के आधार पर सूचना लेने से मना नहीं किया जाना चाहिए।

शिकायत देने से FIR दर्ज होने तक क्या प्रक्रिया होती है?

पुलिस को दी गई प्रत्येक शिकायत अपने-आप FIR नहीं बनती। FIR दर्ज होने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि दी गई सूचना से संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) प्रकट होता है या केवल असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence)। यदि सूचना से केवल असंज्ञेय अपराध प्रकट होता है, तो BNSS की धारा 174 के अंतर्गत अलग प्रक्रिया लागू होती है।

यदि एक ही मामले में एक से अधिक संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध शामिल हों और उनमें से कम-से-कम एक अपराध संज्ञेय हो, तो BNSS के अनुसार उस मामले को संज्ञेय मामला माना जाता है।

संज्ञेय अपराध की सूचना मौखिक (Oral) रूप से या इलेक्ट्रॉनिक संचार (Electronic Communication) के माध्यम से दी जा सकती है। यदि सूचना मौखिक रूप से दी जाती है, तो पुलिस उसे लिखित रूप में दर्ज करती है और सूचना देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाती है। लिखित रूप में दर्ज सूचना पर सूचना देने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर लिए जाते हैं।

यदि सूचना इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से दी गई है, तो BNSS की धारा 173(1) के अनुसार उसे रिकॉर्ड पर लेने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति द्वारा तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर किया जाना आवश्यक है। संज्ञेय मामलों में सूचना और FIR की विस्तृत वैधानिक व्यवस्था BNSS की धारा 173 में दी गई है।

शिकायत में क्या बताएं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना क्या हुई, कब और कहाँ हुई, आरोपी के बारे में क्या जानकारी है और बच्चे को अभी आरोपी या किसी अन्य व्यक्ति से खतरा है या नहीं—ये तथ्य स्पष्ट रूप से बताना उपयोगी है। शिकायतकर्ता के लिए कानूनी धाराएँ तय करना आवश्यक नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि घटना के तथ्य सही और स्पष्ट रूप से बताए जाएँ।

BNSS की धारा 173(3) कुछ ऐसे संज्ञेय अपराधों के लिए विशेष व्यवस्था करती है जिनमें निर्धारित सजा तीन वर्ष या उससे अधिक लेकिन सात वर्ष से कम है। ऐसे मामले में अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए, पुलिस उपाधीक्षक (Deputy Superintendent of Police—DSP) से पूर्व अनुमति लेकर थाना प्रभारी चौदह दिनों के भीतर प्रारंभिक जाँच (Preliminary Enquiry) कर सकता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, अथवा प्रथम दृष्टया मामला होने पर जाँच आगे बढ़ा सकता है। इसलिए प्रत्येक संज्ञेय सूचना में प्रक्रिया बिल्कुल समान होना आवश्यक नहीं है।

दूसरी ओर, यदि सूचना से केवल असंज्ञेय अपराध प्रकट होता है, तो उसकी प्रक्रिया BNSS की धारा 174 में निर्धारित की गई है।

FIR दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी कैसे मिलेगी?

BNSS की धारा 173(2) के अनुसार दर्ज की गई सूचना की एक कॉपी सूचना देने वाले व्यक्ति (Informant) या पीड़ित (Victim) को तत्काल और निःशुल्क दी जानी है। बच्चे के विरुद्ध अपराध के मामले में भी इस कॉपी के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।

कॉपी मिलने पर FIR नंबर, पुलिस थाना, दर्ज करने की तारीख और घटना से संबंधित दर्ज मुख्य तथ्यों को देख लेना उपयोगी है। इससे शिकायतकर्ता यह जान सकता है कि पुलिस रिकॉर्ड में उसकी दी गई सूचना किस रूप में दर्ज हुई है और उसे FIR की कॉपी प्राप्त करने से संबंधित प्रक्रिया में किन विवरणों का संदर्भ रखना है।

बच्चे के विरुद्ध यौन अपराध हो तो POCSO में क्या अलग है?

POCSO Act बच्चे के विरुद्ध यौन अपराध की रिपोर्टिंग के लिए विशेष व्यवस्था करता है। इसकी धारा 19 के अनुसार किसी व्यक्ति को यदि यह आशंका हो कि POCSO के अंतर्गत अपराध होने की संभावना है, या उसे ऐसे अपराध के होने की जानकारी है, तो वह विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना देता है। इसमें स्वयं बच्चा भी शामिल है।

इसका अर्थ यह है कि POCSO मामले में रिपोर्टिंग केवल उस स्थिति तक सीमित नहीं है जब अपराध हो चुका हो और बच्चा या उसके माता-पिता स्वयं शिकायत करने आएँ। कानून ऐसे अपराध की जानकारी या उसके होने की आशंका रखने वाले व्यक्ति के लिए भी रिपोर्टिंग की व्यवस्था करता है। POCSO Act की धारा 19 Mandatory Reporting की जिम्मेदारी निर्धारित करती है।

POCSO के अंतर्गत बच्चे द्वारा दी गई सूचना को सरल भाषा में दर्ज किया जाना चाहिए ताकि बच्चा उसे समझ सके। यदि आवश्यक हो तो अनुवादक या दुभाषिया (Translator or Interpreter) की सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है। शिकायत से आगे POCSO केस दर्ज करने की प्रक्रिया में इन विशेष आवश्यकताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

महत्वपूर्ण

POCSO Act में अपराध की रिपोर्टिंग और सूचना को रिकॉर्ड करना कानूनी जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। अधिनियम की धारा 21 रिपोर्ट करने या मामला रिकॉर्ड करने में विफलता के लिए दंड का प्रावधान करती है। इसलिए POCSO से संबंधित सूचना को सामान्य अनौपचारिक शिकायत की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

शिकायत देते समय बच्चे की सुरक्षा से जुड़ी कौन-सी बात बतानी चाहिए?

शिकायत या FIR दर्ज कराते समय यदि बच्चे को तत्काल खतरा है, तो यह बात पुलिस को स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए। विशेष रूप से यह जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है कि आरोपी बच्चे का रिश्तेदार, अभिभावक, परिचित या उसी घर में रहने वाला व्यक्ति है और क्या उसकी अभी भी बच्चे तक पहुँच है।

आरोपी का परिवार या घर का सदस्य होना शिकायत दर्ज कराने में कानूनी बाधा नहीं है। यदि आरोपी बच्चे के साथ रहता है या आसानी से बच्चे तक पहुँच सकता है, तो यह तथ्य शिकायत के समय ही पुलिस के सामने रखना चाहिए ताकि बच्चे की तत्काल सुरक्षा की आवश्यकता भी स्पष्ट रहे।

तत्काल खतरे की स्थिति

यदि बच्चे की सुरक्षा को अभी खतरा है, तो केवल विस्तृत शिकायत तैयार करने या सभी दस्तावेज एकत्र करने के लिए पुलिस को सूचना देने में देरी नहीं करनी चाहिए। उपलब्ध आवश्यक जानकारी के साथ तत्काल पुलिस सहायता ली जा सकती है।

पुलिस संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज न करे तो क्या करें?

यदि पुलिस थाने का प्रभारी अधिकारी संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना दर्ज करने से मना करता है, तो BNSS की धारा 173(4) शिकायतकर्ता को आगे की कानूनी व्यवस्था देती है। सूचना का सार लिखित रूप में और डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police—SP) को भेजा जा सकता है।

यदि पुलिस अधीक्षक को यह संतोष होता है कि सूचना से संज्ञेय अपराध प्रकट होता है, तो वह स्वयं मामले की जाँच कर सकता है या अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारी से जाँच करा सकता है। इसके बाद भी आवश्यक कार्रवाई न होने पर BNSS के अनुसार संबंधित मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष आवेदन करने का उपाय उपलब्ध है। पुलिस द्वारा सूचना दर्ज न किए जाने की ऐसी स्थिति में FIR न लेने पर उपलब्ध अन्य कानूनी उपाय भी अपनाए जा सकते हैं।

यदि मामला POCSO Act के अंतर्गत आने वाले अपराध का है, तो यह भी ध्यान रखना चाहिए कि POCSO Act रिपोर्ट करने और मामला रिकॉर्ड करने की कानूनी जिम्मेदारी निर्धारित करता है। इसलिए ऐसी सूचना को रिकॉर्ड न किए जाने की स्थिति में POCSO Act की विशेष व्यवस्था भी प्रासंगिक हो सकती है।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

📌 एक नज़र में
  • यह प्रक्रिया बच्चे के विरुद्ध किए गए अपराध की शिकायत और FIR से संबंधित है, बच्चे द्वारा किए गए अपराध से नहीं।
  • बच्चा स्वयं, उसके माता-पिता, अभिभावक या अपराध की जानकारी रखने वाला अन्य व्यक्ति पुलिस को सूचना दे सकता है।
  • संज्ञेय अपराध की सूचना अपराध के क्षेत्राधिकार से स्वतंत्र होकर पुलिस थाने में दी जा सकती है।
  • बच्चों से जुड़े मामलों के लिए बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की व्यवस्था है।
  • यौन अपराध के मामले में POCSO Act की विशेष रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू होती है और स्वयं बच्चा भी सूचना दे सकता है।
  • मौखिक सूचना को लिखित रूप में दर्ज करके सूचना देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाया जाता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक संचार से दी गई सूचना पर तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर करने की व्यवस्था है।
  • दर्ज सूचना की कॉपी सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को तत्काल और निःशुल्क दी जानी है।
  • बच्चे को तत्काल खतरा होने पर यह तथ्य शिकायत देते समय पुलिस को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
  • संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से मना किए जाने पर BNSS की धारा 173(4) के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक और उसके बाद मजिस्ट्रेट तक जाने की व्यवस्था उपलब्ध है।

बाल अपराध की शिकायत और FIR से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या बच्चे के माता-पिता के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है?

हाँ। बच्चे के माता-पिता या अभिभावक के अलावा रिश्तेदार या अपराध की जानकारी रखने वाला अन्य व्यक्ति भी पुलिस को सूचना दे सकता है। अपराध से प्रभावित बच्चा स्वयं भी पुलिस को जानकारी दे सकता है।

क्या बच्चा स्वयं अपने साथ हुए अपराध की सूचना पुलिस को दे सकता है?

हाँ। बच्चा स्वयं पुलिस को अपने साथ हुए अपराध की जानकारी दे सकता है। यदि मामला POCSO Act के अंतर्गत आने वाले यौन अपराध का है, तो स्वयं बच्चा भी विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या स्थानीय पुलिस को सूचना दे सकता है।

बच्चे के साथ अपराध दूसरे जिले या राज्य में हुआ हो तो शिकायत कहाँ करें?

संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की सूचना केवल उसी पुलिस थाना क्षेत्र में देना आवश्यक नहीं है जहाँ घटना हुई है। BNSS की धारा 173(1) के अनुसार ऐसी सूचना क्षेत्र की सीमा से स्वतंत्र होकर दी जा सकती है।

क्या POCSO मामले की सूचना केवल विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) को ही देनी होती है?

नहीं। POCSO Act की धारा 19 के अनुसार सूचना विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या स्थानीय पुलिस को दी जा सकती है। इसलिए शिकायतकर्ता को केवल SJPU तक पहुँचने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।

पुलिस बच्चे के विरुद्ध संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज न करे तो क्या करें?

BNSS की धारा 173(4) के अनुसार सूचना का सार लिखित रूप में और डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police—SP) को भेजा जा सकता है। इसके बाद भी आवश्यक कार्रवाई न होने पर संबंधित मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष आवेदन करने का कानूनी उपाय उपलब्ध है।

क्या FIR की कॉपी लेने के लिए कोई शुल्क देना पड़ता है?

नहीं। BNSS की धारा 173(2) के अनुसार दर्ज की गई सूचना की कॉपी सूचना देने वाले व्यक्ति (Informant) या पीड़ित (Victim) को तत्काल और निःशुल्क दी जानी है।

निष्कर्ष

बच्चे के विरुद्ध अपराध की शिकायत दर्ज कराते समय सबसे महत्वपूर्ण बात घटना के सही तथ्य पुलिस तक पहुँचाना और यदि बच्चे को तत्काल खतरा है तो उसकी जानकारी स्पष्ट रूप से देना है। संज्ञेय अपराध की सूचना क्षेत्राधिकार की सीमा से स्वतंत्र होकर पुलिस थाने में दी जा सकती है और दर्ज सूचना की कॉपी सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को तत्काल तथा निःशुल्क दी जानी है।

यदि मामला बच्चे के विरुद्ध यौन अपराध का है, तो सामान्य आपराधिक प्रक्रिया के साथ POCSO Act की विशेष रिपोर्टिंग व्यवस्था भी लागू होती है। बच्चों से जुड़े मामलों के लिए बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की व्यवस्था भी कानून में की गई है। पुलिस द्वारा संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज न किए जाने की स्थिति में BNSS आगे शिकायत करने का कानूनी मार्ग उपलब्ध कराता है।